खुद को मुक़द्दर की ज़िद से आजमाने का दिल करता है..

यू तो नही कुछ वजूद मेरा ,तेरे दिल की दहलीज पर ।।।।। फिर भी न जाने क्यों हक़ जताने को ,,,,,,,,दिल करता है ।।।। जानता हूं, मेरी अभी कुछ नहीं हो तुम,, फिर भी , अपना बनाने को ,,,,,,,,दिल करता है ।।।। आसां नही इश्क़ ज़माने में 'अक्स'  फिर भी ,,,,,       
खुद को मुक़द्दर की ज़िद से आजमाने का दिल करता है ।।।।